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Wednesday, October 25, 2017

शासनादेश की खुलेआम उडाई जा रही धज्जियां

जावेद आरिफ रायबरेली ब्यूरो चीफ
अक्रॉस टाइम्स हिंदी समाचार पत्र
रायबरेली। सूबे के मुख्यमंत्री जहां अधिकारियों को जनता का दर्द सुनने के लिये हरसंभव मदद करने के लिये तरह तरह के आदेश पारित कर रहे है वहीं अधिकारियों की हालत ये है कि मलाई का स्वाद लगने के बाद उस स्थल को छोडने को राजी नही हो रहे जिस मामले मे यहां तक की कोर्ट तक पहुंचने पर उस अधिकारी का नाम चर्चा का विषय बना हुआ है। हलाकि ये कोई और नही बल्कि बाल विकास परियोजना अधिकारी सलोन है। जिला रायबरेली से 40 किलोमीटर के तकरीबन दूर सलोन तहसील है जिस तहसील के अन्तर्गत ब्लाक सलोन के बालविकास परियोजना अधिकारी का अफिस है। जहां पर तैनात सीडीपीओ को एक दो वर्श नही बल्कि सात वर्ष के तकरीबन हो गये है जो यहीं के यहीं तैनात है सूत्रों की माने तो यहां पर ये अधिकारी अपने कई कारनामो के लिये बहुचर्चित है हलाकि लोगों का कहना कि सलोन ब्लाक मै तैनात सीडीपीओ यहां पर लूटमार पर उतारू है जिसके लिये यहां पर सुपरवाइजर के माध्यम से गर्भस्थ महिलाय किशोरीयमासूम बच्चों से लेकर विभागीय आने वाले योजनाओं का खर्च का वारा न्यारा किया जा रहा है। जिससे ये कागजी खर्च दिखाकर उसके नाम पर जब से तैनात है कई लाखों का खेल कर चुका है।जिसको लेकर ऐसा भी यहां के वंशिदे मानते है कि कोर्ट तक का सहारा लेकर सीडीपीओ यहीं पर जमा हुआ है जो साफ उनके काले कारनामों की ओर इशारा कर  रहा है क्योंकि यदि ईमानदारी है तो कहीं पर तबादला होगा वही पर नौकरी कर लिया जायेगा।

अखिर क्या उच्चाधिकारियों की नजर से दूर हैं

बाल विकास परियोजना के जिले से लेकर लखनऊ तक के अधिकारियों के नजर से क्या ये अधिकारी दूर है जिसको लेकर विभागीय सवाल खडा कर रहा है क्या उच्चाधिकारियों से है सेटिंग गेटिंग जो लंबे समय से एक ही जगह पर नियम को ताक पर तैनात है सीडीपीओ हलाकि ये चर्चा का विषय है।

क्या प्रशासनिक अधिकारी खमोश है

नियम को ताक पर रख एक ही जगह पे सात वर्षों से तैनात सीडीपीओ के ऊपर क्या प्रशासनिक अधिकारियों की नजर नही गयी है यदि गयी है तो नियमाविरूद्ध टिके सीडीपीओ पर कार्यवाही अभी तक क्यों नही किया गया है ये सवाल प्रशासिनक अधिकारियों की ओर इंगित कर रहा है क्योंकि इसके लिये विभागीय रिकार्ड मांगे जाते है।
क्या सचमुच यहां से रिस्ता जुडा है या कर रहा है खेल

सलोन ब्लाक के सीडीपीओ का यहां से सचमुच रिस्ता जुड गया है या यहां पर विभागीय खेल यानी पैसा कमाने के लिये यहां पर टिके हुए है हलाकि सीडीपीओ के तैनाती नियमाविरूद्ध होने यानी एक अधिकारी को सात वर्षों तक एक ही ब्लाक मे नही रखा जा सकता है यदि उसको रखा भी गया तो क्या जरूरत थी सीडीपीओ को कोर्ट से अपना तबादला रोकवाने की क्या कोर्ट आदेश अभी तक चल ही रहा है या अधिकारी भी नजर अंदाज कर रहे है जिसको लेकर तरह तरह की चर्चा है।

सीडीपीओ के एक और आदत है जो.......

सलोन सीडीपीओ चर्चित एक और मामले मे बताये जा रहे है खाऊ कमाऊ के साथ साथ लोगों की माने तो उनका आफिस मे कम वे अपने कमरे मे ज्यादा ही व्यस्त रहते है ऐसा भी मानते है कि कुछ आंगनवाडी कार्यकत्री एवं सुपरवाइजर को अपने कमरे ही बुलाकर कुछ अजग गजब कारनामा करते है जिसको लेकर वे चर्चित भी है।

क्या सीडीपीओ के ऊपर है सफेद पोषियों का हांथ

लंबे समय से तैनात सीडीपीओ अपने आप सलोनब्लाक को छोडने से गुरेज कर रहे है जिसके पीछे कहीं सफेद पोशियों का हांथ तो नही है हलाकि स्थानीय ग्रामीणों का कहना कि महीना व सप्ताह कुछ सफेद पोशी नेताओं को भी पहुंचाने जाने की चर्चा है। जिसको लेकर कयाश लगाये जा रहे है कि सफेदपोशी नेताओं की कृपा भी इस सीडीपीओ पर है।

सीएम के नियम पर लग रहा है सेंध

सूबे के मुख्यमंत्री तक का आदेश है कि लंबे समय से तैनात जो भी अधिकारी व कर्मचारी एक ही जगह पर तैनात है तो उसको तत्काल हटाया जाये और उसकी जगह दूसरे को तैनात किया जाये जिससे जनता लाभान्वित हो सके लेकिन ये आदेष भी यहां पर सात वर्शों से जमे सीडीपीओ का तबादला नही करवा सका है।
क्या कहते है जिला कार्यक्रम अधिकारी

इस सम्बन्ध में जब जिलाकार्यक्रम अधिकारी मनोज कुमार से बात की गई तो बातचीत के दौरान पूछा गया कि आपके जिले में सलोन में एक ही ब्लाक में सात वर्षो से बालविकास परियोजनाधिकारी जमे है क्या आपकों जानकारी है। तो उन्होनंे कहा कि जी हा शासनादेश है कि एक सीडीपीओ जिले में 3 वर्श ही रह सकता है, तो सात साल से ब्लाक में कैसे रह सकता है। चलिए फिर भी हम इसकों देखते है।

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